Newly added Hindi books - नई हिन्दी पुस्तकें
लोगों की राय

नई पुस्तकें

जमीर का कैदी

सुरेन्द्र मोहन पाठक

मूल्य: $ 8.95

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जहरबाद

अब्दुल बिस्मिल्लाह

मूल्य: $ 12.95

इसकी कथाभूमि मध्य प्रदेश एक पूर्वी छोर पर स्थित मंडला अंचल है। वहां के ग्रामीण परिवेश में रचे गए इस उपन्यास में ऐसे चरित्रों के निरूपण हुआ है जो आजाद हिंदुस्तान कि बड़ी-बड़ी विकास योजनाओं से एकदम अछूते और अपरिचित है और गरीबी कि रेखा के बहुत नीचे का जीवन जी रहे है।

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विमल सीरीज कैसे बनी

सुरेन्द्र मोहन पाठक

मूल्य: $ 8.95

जुड़िये फिर विमल के विस्फोटर संसार से। मिलिए फिर सुरेन्द्र मोहन पाठक के जबरदस्त किरदार से।

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सोच बदलो जिंदगी बदलो

ब्रायन ट्रेसी

मूल्य: $ 12.95

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शेरपुर 15 मील

विजयमोहन सिंह

मूल्य: $ 8.95

‘शेरपुर 15 मील की कथायात्रा फत लम्बी है-वह महज 15 मील नहीं है। एक कहानीकार के रूप में विजयमोहन सिंह किसी मुख्य धारा में शामिल नहीं रहे-न नई कहानी की, न साठोतरी कहानी की। वे किसी विचारधारा विशेष के जयघोषों के अश्वारोही भी नहीं रहे और न आधुनिकता से आक्रांत, प्रायः उसकी प्रतिकृतियाँ रचनेवाले कथाकारों से प्रभावित। उन्होंने प्रारम्भ से ही अपना निजी शिल्प तथा कथा-भाषा निर्मित की।

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शादी का जोकर

अब्दुल बिस्मिल्लाह

मूल्य: $ 12.95

लेखक ने आम जिंदगी से झांकती परेशानी, पशेमानी और कशमकश से इन कहानियों के सूत्र सहेजे हैं। पहली ही कहानी ‘खून’ रिश्तों की हिफाजत करनेवाले शख्स और बेमुरव्वत दुनिया की दास्तान है।

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सर्वश्रेष्ठ समृद्धि के 7 नियम

सेसिल ओ. केंप

मूल्य: $ 8.95

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समय और साहित्य

विजयमोहन सिंह

मूल्य: $ 12.95

विजयमोहन सिंह हमारे समय के सजग कथाकार और आलोचक हैं; इस पुस्तक में उनकी उन गद्य रचनाओं को शामिल किया गया है जो बीच-बीच में उन्होंने पत्र-पत्रिकाओं और संगोष्ठी-सेमिनारों आदि के लिए लिखीं।

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समर शेष है

अब्दुल बिस्मिल्लाह

मूल्य: $ 16.95

समर शेष है अब्दुल बिस्मिल्लाह का आत्म-कथात्मक उपन्यास है। कथा-नाटक है , सात-आठ साल का मात्रिविहीन एक बच्चा, जो कि पिता के साथ-साथ स्वयं भी भारी विषमता से ग्रसित है। लेकिन पिता का असामयिक निधन तो उसे जैसे एक विकत जीवन-संग्राम में अकेला छोड़ जाता है। पिता के सहारे उसने जिस सभ्य और सुशिक्षित जीवन के सपने देखे थे, वे उसे एकाएक ढहते हुए दिखाई दिए।

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रामलीला की उत्पत्ति तथा विकास

मोहन राम यादव

मूल्य: $ 20.95

भक्ति-संप्रदाय में वे भगवान् के अवतार माने जाते हैं। अतः उनके चारित्रिक गुण एवं जीवन का ज्ञान बड़े उत्साह से प्राप्त किया जाता है। रामलीला का आयोजन भारत में तो अत्यन्त प्राचीन काल से होता ही रहा है, विदेशों में भी सहस्त्रो वर्षों से बसे भारतीय इसे अक्षुण्ण बनाये हुए हैं। इस प्रकार रामलीला ने विदेशों में स्थापित भारतीय सांस्कृतिक सम्बन्ध को ऐसा दृढ बना दिया है कि सहस्त्रों वर्षों तक निरंतर प्रयत्न करते रहने पर भी काल उसे नष्ट करने में समर्थ नहीं हो सका है। इसमें सांस्कृतिक जीवन कि ऐसी महत्तपूर्ण झाँकी मिलती है जो इस युग में भी समस्त क्षेत्रों में मानव का पथ-प्रदर्शन करने में सर्वथा समर्थ है।

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